नागपुर के तेलंगखेड़ी में स्थित संकटमोचन बड़े हनुमान मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह केवल नागपुर ही नहीं बल्कि संपूर्ण विदर्भ में विख्यात है। तेलंगखेड़ी गाँव में स्थित होने के कारण इसे “तेलंगखेड़ी हनुमान” के नाम से अधिक प्रसिद्धि प्राप्त है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहाँ के हनुमान जागृत हैं। वे श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। हनुमान मंदिर के साथ ही यहाँ का कल्याणेश्वर शिवमंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। यह विदर्भ के अनेक श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र है।
यह हनुमान मंदिर फुटाला तालाब और सेमिनार हिल के मध्य भाग की एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ की हनुमान पाषाण मूर्ति स्वयंभू है। यद्यपि इसके प्रकट होने का निश्चित समय ज्ञात नहीं है। विद्वानों के अनुसार यह मंदिर भोंसले राजवंश से पूर्व का है। कहा जाता है कि लगभग 300 वर्ष पूर्व यहाँ घना जंगल था। उस समय यह भूमि साधुओं की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध थी। अनेक नागा साधु यहाँ होम-हवन करते थे। उस समय की धूनी आज भी मंदिर परिसर में विद्यमान है। इसके अतिरिक्त यहाँ उन महंतों की समाधियाँ भी स्थित हैं जिन्होंने इस मंदिर की सेवा की। यह भी मान्यता है कि सत्ययुग में इस पहाड़ी पर भगवान श्रीराम ने कुछ समय के लिए निवास किया था।
नागपुर शहर की सीमा पर सेमिनार हिल के समीप मुख्य मार्ग पर मंदिर का मेहराबदार प्रवेशद्वार है। यहाँ पूजा सामग्री की लगभग 50 से 60 दुकानें हैं। ऊँचाई पर स्थित मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 60 सीढ़ियाँ बनी हैं। ये संगमरमर की सीढ़ियाँ बीच में विभाजक के साथ बनाई गई हैं। इससे श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग उपलब्ध हैं। सीढ़ी मार्ग के किनारे प्राचीन वटवृक्ष हैं। वहाँ भी कुछ सिंदूरचर्चित पाषाण मूर्तियाँ स्थित हैं। मुख्य मंदिर से पूर्व में गंगागिरी महाराज की समाधि है। मंदिर के विशाल सभामंडप में स्थित गर्भगृह में एक चबूतरे पर लगभग 6 फीट ऊँची स्वयंभू सिंदूरचर्चित हनुमान पाषाण मूर्ति विराजमान है। पाषाण मूर्ति के मस्तक पर मुकुट है। उसके पीछे विशिष्ट आभामंडल की संरचना बनी है। गर्भगृह के चारों ओर श्रीगणेश, श्रीदत्त, राम-लक्ष्मण-सीता, सरस्वती माता, गायत्री देवी, श्रीविष्णु-लक्ष्मी, गौरीशंकर, कपिल मुनि, भगवान परशुराम, त्रिमुखी कार्तिक स्वामी, पंचमुखी हनुमान, महादेव, राधा-कृष्ण एवं दुर्गामाता के मंदिर स्थित हैं।
मंदिर परिसर विशाल है। यहाँ धार्मिक कार्यक्रमों के लिए बड़ा सभामंडप है। मंगलवार एवं शनिवार को यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। हनुमान जयंती पर यहाँ भव्य उत्सव मनाया जाता है। प्रातःकाल हनुमान पाषाण मूर्ति का अभिषेक किया जाता है। इसके पश्चात आरती एवं हनुमान चालीसा का पाठ होता है। इस अवसर पर दिन भर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें अखंड रामायण पाठ, भजन एवं कीर्तन मुख्य हैं। मंदिर समिति यहाँ योगशाला एवं गोशाला भी संचालित करती है। प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से सायं 7 बजे तक श्रद्धालुओं को हनुमान जी के दर्शन होते हैं।
तेलंगखेड़ी हनुमान मंदिर से लगभग 1.5 से 2 किमी की दूरी पर कल्याणेश्वर शिवमंदिर स्थित है। यह भी नागपुर का प्राचीन एवं प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार यह पूर्वाभिमुख मंदिर सन् 1794 में निर्मित कराया गया था। इसका निर्माण द्वितीय रघुजी की माता एवं मुधोजी की पत्नी चिमाबाई ने किया था। इस प्रकार यह मंदिर 230 सालों से अधिक प्राचीन है। इस मंदिर के दो प्रवेशद्वार हैं। एक उत्तर की ओर है और दूसरा दक्षिण की ओर। मंदिर की संरचना सभामंडप, अंतराल एवं गर्भगृह से मिलकर बनी है। सभामंडप के प्रवेशद्वार पर 12 स्तंभ हैं। ये ऊपर 11 तोरणनुमा मेहराबों द्वारा आपस में जुड़े हैं। सभामंडप में 32 स्तंभ हैं। अंतराल के दोनों सिरों पर तीन-तीन अर्धस्तंभ स्थित हैं। इसके अतिरिक्त कई स्तंभ दीवारों में जुड़े हुए हैं। यह नगर का एकमात्र प्राचीन मंदिर है जिसमें कुल 97 स्तंभ हैं। अंतराल एवं सभामंडप के मध्य भाग में नंदी की विशाल पाषाण मूर्ति है।
अंतराल में स्थित दो देवकोष्टकों में से एक में दो फीट ऊँची पीतल की गणेश पाषाण मूर्ति है। गर्भगृह के प्रवेशद्वार पर विशेष नक्काशी नहीं है। परंतु दोनों ओर द्वारपाल एवं ललाटबिंब पर गणेश मूर्ति है। गर्भगृह में विशाल शिवलिंग है। इस पर पीतल का आवरण चढ़ा है। कहा जाता है कि यह मंदिर प्राचीन काल से भोंसले वंश का कुलदैवत था। श्रावण मास में भोंसले परिवार द्वारा यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की जाती थी। सन् 1925 में भोंसले परिवार की संपूर्ण संपत्ति न्यायालय के अधीन चली गई थी। परंतु यह मंदिर भोंसले वंशजों के पास ही रहा। वर्तमान में यह मंदिर विश्व धरोहर स्थलों की सूची में सम्मिलित है। नागपुर का यह विख्यात मंदिर प्रतिदिन अनेक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। श्रावण के सोमवार को यहाँ हजारों की भीड़ होती है। महाशिवरात्रि पर आयोजित उत्सव में लगभग एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। प्रतिदिन प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालुओं को कल्याणेश्वर के दर्शन उपलब्ध रहते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
यह नागपुर से 5 किमी तथा रेलवे स्टेशन से 4 किमी की दूरी पर स्थित है।
हनुमान मंदिर तक एसटी बस की सुविधा उपलब्ध है।
निजी वाहन दोनों मंदिरों के पार्किंग स्थल तक पहुँच सकते हैं।
परिसर में ठहरने एवं जलपान के लिए अनेक विकल्प उपलब्ध हैं।