रामटेक शहर के समीप स्थित तीर्थक्षेत्र आंबाला तथा उससे जुड़ी नारायण पहाड़ी पर स्थित भव्य नारायण स्वामी दरबार प्राचीन काल से संतभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ श्री सद्गुरु नारायण स्वामी महाराज ने लगभग 500 साल पूर्व संजीवन समाधि ली थी। इस दरबार की विशेषता यह है कि जिस समय सद्गुरु नारायण स्वामी ने जीवित समाधि ली थी, उस समय उनके द्वारा प्रज्वलित दीपज्योति आज 500 साल बाद भी अखंड प्रज्वलित है। इसी कारण इस दरबार को ज्योतिस्वरूप सद्गुरु दरबार भी कहा जाता है।
रामटेक पहाड़ी के नीचे प्राकृतिक रूप से बना सरोवर ‘आंबाला सरोवर’ कहलाता है। इस सरोवर का क्षेत्रफल 1,33,500 वर्ग मीटर है। सरोवर के किनारे अनेक ऋषि-मुनियों के आश्रम स्थित हैं। यहाँ प्राचीन मंदिर एवं स्मारक भी बने हुए हैं। इनमें प्राचीन द्विमंजिला शिव मंदिर, सूर्य मंदिर और चंद्रमोली मंदिर प्रमुख हैं। यहाँ मराठा सरदार मुधोजी भोसले की पत्नी चिमाबाई भोसले की समाधि सहित कुल 33 मंदिर और स्मारक हैं। इनमें से अनेक गोंड और भोसले कालीन हैं। कुछ स्मारकों का निर्माण बाद के काल में हुआ है। इस सरोवर के समीप प्राचीन काल से दशक्रिया विधि सम्पन्न होती है। नाशिक की भाँति यहाँ के पंडितों के पास भी कई कुलों की वंशावलियाँ सुरक्षित हैं। आंबाला सरोवर और उसका परिसर यादव काल से ही महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल और आस्था केंद्र माना जाता रहा है। इस सरोवर में नौकायान की सुविधा भी उपलब्ध है। राज्य सरकार ने आंबाला सरोवर क्षेत्र को ‘क’ श्रेणी तीर्थक्षेत्र घोषित किया है।
आंबाला सरोवर से सटी नारायण पहाड़ी पर सद्गुरु नारायण स्वामी महाराज की संजीवन समाधि स्थित है। कहा जाता है कि लगभग 500 साल पूर्व नारायण स्वामी महाराज ने यहाँ तपस्या की थी। प्रत्यक्ष महालक्ष्मी ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। उन्होंने गुप्तरूप से इस पहाड़ी पर वास करने का वरदान दिया। समाधि लेने से पूर्व सद्गुरु नारायण स्वामी ने अपने प्राण शेषनाग में स्थापित किए थे। इसी कारण आज भी श्रद्धालुगण का विश्वास है कि नारायण स्वामी शेषरूप में विद्यमान हैं। साथ ही महालक्ष्मी यहाँ गुप्तरूप में इस पहाड़ी पर वास करती हैं।
विभिन्न ग्रंथों के अनुसार संतश्रेष्ठ तुकडोजी महाराज ने इस स्थान पर 12 साल साधना की थी। इसके अतिरिक्त योगिराज स्वामी सीतारामदास महाराज और माताजी गौरीशंकर महाराज ने भी यहाँ तप किया था। संत दामोदरदास महाराज आदि ने भी नारायण पहाड़ी पर कई सालों तक तपश्चर्या की थी। इन संतों ने साधना के लिए श्रीराम मंदिर और नागार्जुन स्वामी मंदिर के मध्य स्थित एक स्थान चुना। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न पर्वतीय क्षेत्र है। इसे वर्तमान में नारायण पहाड़ी कहा जाता है।
नारायण पहाड़ी के सर्वांगीण विकास का श्रेय श्री दत्तगुरु बालयोगी छोटूबाबा को जाता है। उन्होंने इस पहाड़ी का कायाकल्प कर यहाँ भव्य मंदिर का निर्माण कराया। छोटूबाबा का जन्म रामटेक के आंबाला क्षेत्र में हुआ था। वे 1986 में इस स्थान पर आए। उन्होंने एक ही स्थान पर बैठकर साढ़े तीन साल तपश्चर्या की। उसी समय सद्गुरु नारायण स्वामी ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। नारायण स्वामी के आदेशानुसार छोटूबाबा ने यहाँ 18 से 26 दिसंबर तक नारायण स्वामी का पुण्यतिथि महोत्सव मनाना आरंभ किया। इस अवधि में ‘ॐ नमो नारायणाय’ महामंत्र का अखंड जप होता है। साथ ही यहाँ विधिवत पूजा, अभिषेक, भजन, कीर्तन एवं प्रवचन आयोजित किए जाते हैं। इन नौ दिनों में आने वाले श्रद्धालुगण को प्रतिदिन महाप्रसाद दिया जाता है। यह यहाँ का प्रमुख उत्सव है। इसमें विदर्भ सहित महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
आंबाला सरोवर से सटी नारायण पहाड़ी पर पहुँचने हेतु सोपान मार्ग और सड़क मार्ग दोनों उपलब्ध हैं। सरोवर की ओर से जाने वाले सोपान मार्ग पर विशिष्ट मेहराब है। इस पर भव्य गरुड़ शिल्प निर्मित है। नारायण पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर विशाल और आधुनिक शैली में निर्मित है। इसमें राजस्थानी लाल पाषाण और संगमरमर का उपयोग हुआ है। मंदिर का शिखर पूर्णतः नीली पारदर्शक काँच से बना है। इसके कारण दिनभर गर्भगृह में स्थित समाधि पर नीला प्रकाश पड़ता रहता है। पूरे मंदिर परिसर में फर्शबंदी की गई है। यहाँ एक मनोहर उद्यान भी विकसित किया गया है। मंदिर के सम्मुख अनेक बड़े-बड़े गमलों में सजावटी और पुष्पवृक्ष लगाए गए हैं। इससे समूचा परिसर आकर्षक दिखता है।
बालयोगी छोटूबाबा 6 दिसंबर 2008 को ब्रह्मलीन हुए। नारायण स्वामी दरबार मंदिर के समीप ही छोटूबाबा का समाधि मंदिर स्थित है। यहाँ 19 फरवरी को बालयोगी छोटूबाबा का प्रकटदिन महोत्सव मनाया जाता है। इसके बाद गुरुपूर्णिमा महोत्सव और 18 से 26 दिसंबर तक नारायण स्वामी का पुण्यतिथि महोत्सव आयोजित होता है। ये यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं।
प्रातः 6 से दोपहर 12 बजे तक और सायं 4 से रात्रि 9 बजे तक नारायण स्वामी दरबार में श्रद्धालुगण समाधि के दर्शन कर सकते हैं। गुरुवार को प्रातः 8 से 9 बजे तक समाधि पर अभिषेक किया जाता है। प्रतिदिन प्रातः 10 से दोपहर 1 बजे तक श्रद्धालुगण के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था रहती है।
प्रमुख विशेषताएँ
नागपुर से 51 किमी तथा रामटेक से 3 किमी दूरी
नागपुर से हर घंटे रामटेक हेतु राज्य परिवहन बस सुविधा
रामटेक से निजी वाहन द्वारा आंबाला सरोवर पहुँचा जा सकता है
निजी वाहन नारायण स्वामी दरबार के पार्किंग स्थल तक जा सकते हैं