कामठी तहसील के खापरखेड़ा के समीप कन्हान, कोलार और पेंच नदियों के संगम पर भोंसले कालीन श्री संगमेश्वर शिव मंदिर स्थित है। यह त्रिवेणी संगम “बिना संगम” के नाम से प्रसिद्ध है। इसी कारण इस मंदिर को “बिना संगम मंदिर” के रूप में पहचाना जाता है। यह मंदिर कामठी, पारशिवनी और सावनेर तहसीलों की सीमा पर स्थित है। यह परिसर न केवल तीर्थक्षेत्र है बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी सुप्रसिद्ध है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस मंदिर को तीर्थक्षेत्र की ‘क’ श्रेणी की सूची में शामिल किया गया है।
संगम तट पर स्थित यह शिव मंदिर साधारण संरचना वाला है। तथापि यह जिले के हजारों श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र है। मंदिर परिसर लगभग सवा दो एकड़ क्षेत्रफल में फैला है। यहाँ शिव मंदिर और महामुक्तेश्वर धाम स्थित हैं। परिसर में जैन धर्म के 24 प्रतीक भी स्थापित हैं। शिव मंदिर के सामने के भाग में, अर्थात दर्शनमंडप में चार स्तंभ हैं। ये तोरणनुमा मेहराबों द्वारा आपस में जुड़े हैं। इस मंडप पर दो शिखर बने हैं। यहीं चबूतरे पर मनोहर नंदी पाषाण मूर्ति विराजमान है। गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। हर साल महाशिवरात्रि पर यहाँ मेला आयोजित होता है। इस मेले की परंपरा वर्ष 1981 से प्रारंभ हुई। नागपुर जिले के अनेक श्रद्धालु इस अवसर पर यहाँ आते हैं। मेले में सम्मिलित श्रद्धालुओं को ग्रामीणों द्वारा महाप्रसाद वितरित किया जाता है। त्रिवेणी संगम पर स्थित होने के कारण यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से प्रमुख भूमिका रखता है।
ऋषि पंचमी के दिन यहाँ श्रद्धालु महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रहती है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान कर महादेव के दर्शन करने से पुण्य प्राप्त होता है। मंदिर में प्रतिदिन हरि-कीर्तन और प्रवचन होते हैं। अधिक मास में यहाँ पूरे महीने विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह संगम अस्थि विसर्जन के लिए भी प्रसिद्ध है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के उपरांत की विधियाँ संपन्न करने यहाँ आते हैं।
शिव मंदिर के साथ ही यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु एवं पर्यटक यहाँ आते हैं। परिसर में पूजा सामग्री की सैकड़ों दुकानें हैं। प्रत्येक रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर यहाँ 25,000 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति होती है। इनमें 15 अगस्त, 26 जनवरी, दशहरा और दीपावली जैसे दिन भी शामिल हैं। यहाँ का झुणका-भाकर प्रसिद्ध है। इसके लिए परिसर में अनेक भोजनालय हैं। आने वाले श्रद्धालु एवं पर्यटक यहाँ की स्वादिष्ट झुणका-भाकरी का आनंद अवश्य लेते हैं।
शिव मंदिर के समीप स्थित महामुक्तेश्वरी धाम मंदिर भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसमें देवी काली के दस रूप और दुर्गामाता के नौ रूप स्थापित हैं। साथ ही महादेव अपनी आठ शक्तियों सहित यहाँ विराजमान हैं। बताया जाता है कि संपूर्ण राज्य में यह एकमात्र ऐसा स्थान है। प्रातः 5 बजे से सायं 7 बजे तक श्रद्धालु महादेव मंदिर एवं महामुक्तेश्वरी धाम मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
मंदिर के अतिरिक्त बिना संगम पर स्थित विद्युत उत्पादन केंद्र भी इसकी पहचान का भाग है। इसके आसपास की कोयला खदानें भी महत्त्वपूर्ण हैं। कन्हान से उत्तर-पश्चिम में सावनेर तक का क्षेत्र 138 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसके मध्य भाग में बिना संगम क्षेत्र और पश्चिम में सिल्लेवाड़ा क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में कोयला पाया जाता है। भारतीय खनिज विभाग के अनुसार यहाँ की चट्टानों के बीच 85 से 125 मीटर की गहराई तक कोयले की पाँच परतें हैं। इनमें प्रथम से तृतीय श्रेणी तक का कोयला मिलता है। निचली दो परतों में उच्च गुणवत्ता वाला कोयला प्राप्त होता है। इस क्षेत्र में कुल 83.66 मिलियन टन कोयले का भंडार उपलब्ध है।
प्रमुख विशेषताएँ
यह कामठी से 7 किमी और नागपुर से 24 किमी की दूरी पर है।
कामठी एवं नागपुर से खापरखेड़ा के लिए एसटी बस की सुविधा उपलब्ध है।
निजी वाहन मंदिर के पार्किंग स्थल तक पहुँच सकते हैं।