नागपुर जिले में खंडोबा का एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर नागपुर शहर के मध्य में स्थित है। खंडोबा भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। उन्होंने मणि और मल्ल नामक राक्षसों का वध करने के लिए यह अवतार लिया था। खंडोबा को “मल्हारी मार्तंड” के नाम से भी जाना जाता है। नागपुर में लगभग 400 वर्ष पुराना यह देवस्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पौष पूर्णिमा के दिन यहाँ प्रमुख उत्सव के रूप में खंडोबा का विवाह समारोह मनाया जाता है। इस उत्सव में हजारों श्रद्धालु सहभागी होते हैं। यह देवस्थान जागृत माना जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि खंडोबा उनकी प्रार्थना पूरी करते हैं।
नागपुर में सुभाष मार्ग पर कॉटन मार्केट के सम्मुख स्थित खंडोबा मंदिर नागपुर के रघुजीराजे भोसले के कार्यकाल में बनाया गया था। ऐसा उल्लेख मिलता है। खंडोबा को क्षत्रिय देवता माना जाता है। परंतु उनके श्रद्धालुओं में अनेक जातियों के लोग सम्मिलित हैं। मराठा, धनगर और रामोशी जातियों के श्रद्धालु यहाँ बड़ी संख्या में दर्शन हेतु आते हैं। चूँकि बाणाई का पालन-पोषण एक धनगर ने किया था, इसलिए धनगर समाज खंडोबा को अपना आराध्य देवता मानता है।
खंडोबा मंदिर पूर्वाभिमुख है। पूर्व और उत्तर दिशाओं से मंदिर परिसर में प्रवेश हेतु मेहराब हैं। पूर्व दिशा में दो दीपमालाएँ हैं। मंदिर के मध्य में स्थित गर्भगृह में खंडोबा की प्राचीन पाषाण मूर्ति है। इस मूर्ति के दोनों ओर खंडोबा और म्हाळसा की मूर्तियाँ स्थापित हैं। इन मूर्तियों के सम्मुख शिवलिंग स्थापित है। इसके अतिरिक्त मूर्तियों के समीप नंदी, घोड़े और श्वान की प्रतिमाएँ हैं। खंडोबा की पहली पत्नी म्हाळसा तथा दूसरी पत्नी बाणाई मानी जाती हैं। मंदिर के उत्तर दिशा के प्रवेशद्वार के समीप बाणाई का एक स्वतंत्र मंदिर भी स्थित है।
मार्गशीर्ष माह में चंपाषष्ठी और पौष पूर्णिमा के दिन खंडोबा विवाह उत्सव मनाया जाता है। ये दो यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं। इनमें से पौष पूर्णिमा को मनाया जाने वाला विवाह समारोह नागपुर के प्रमुख उत्सवों में से एक माना जाता है। इस अवसर पर विदर्भ सहित महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से हजारों श्रद्धालु खंडोबा के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं। लगभग 300 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया जाता है। विवाह समारोह के अंतर्गत निकलने वाली पालकी में ‘येळकोट येळकोट जय मल्हार… सदानंदाचा येळकोट…’ की गूंज होती है। श्रद्धालुओं द्वारा हल्दी का भंडारा और सूखे नारियल की वर्षा की जाती है। इस उत्सव काल में मंदिर परिसर में सैकड़ों पूजा-सामग्री और प्रसाद की दुकानें लगती हैं।
प्रार्थना पूरी होने के अवसर पर श्रद्धालु खंडोबा को बैंगन का भरता और रोट के रूप में नैवेद्य अर्पित करते हैं। इसके अतिरिक्त हल्दी का भंडारा और सूखे नारियल का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। बाद में हल्दी और नारियल प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं। खंडोबा देवस्थान में मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से लेकर शुक्ल षष्ठी तक छह दिन का उत्सव आयोजित होता है।
पौष पूर्णिमा को खंडोबा का विवाह म्हाळसा से और श्रावण पूर्णिमा को बाणाई से हुआ था। ऐसा माना जाता है। इन सभी विशेष अवसरों पर यहाँ उत्सव आयोजित किए जाते हैं। रविवार को खंडोबा का विशेष दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन विशेष पूजा होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। राज्य सरकार की तीर्थक्षेत्र ‘क’ दर्जा सूची में इस देवस्थान को सम्मिलित किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ:
नागपुर रेलवे स्टेशन से केवल 2 किमी दूर स्थित है।
नागपुर के लिए महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से राज्य परिवहन की बसें, रेल और विमान सेवा उपलब्ध है।
निजी वाहन मंदिर के वाहनतल तक पहुँच सकते हैं।
भक्तनिवास और जलपान के लिए आसपास कई विकल्प उपलब्ध हैं।